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संस्कार

चूड़ाकरण

पहला मुंडन — पुराना छोड़ नए आरंभ का संकेत।

कब पहले या तीसरे वर्ष में, कुल की परंपरा से।

चूड़ाकरण या मुंडन में जन्म के बाल उतारे जाते हैं। कई परिवार बाल किसी नदी या तीर्थ में प्रवाहित करते हैं। मान्यता है कि शैशव का बोझ हटे और बालक हल्का होकर आगे बढ़े। सिर पर चोटी या एक मुट्ठी बाल छोड़ने की रीति भी कई कुल में है।

यह नाई और पुरोहित दोनों के साथ होता है। स्वच्छता और बच्चे की सहमति — जितनी उम्र हो — आज के घर का विवेक है। बलपूर्वक भीड़ में यह न करें।

यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।

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