भारत के परिवारों और विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए

सेवाएँ

जब करने का समय आए

सेवा का अर्थ बुकिंग-कार्ट नहीं। आप जरूरत लिखते हैं, अनुरोध दर्ज होता है, और आगे का संपर्क उसी सूत्र से होता है।

तीन कदम

  1. ०१

    पढ़ें

    संस्कार, पूजा, तीर्थ और लोक संस्कृति को सरल हिन्दी या अंग्रेज़ी में समझें।

  2. ०२

    अपनी रीति पहचानें

    जो लिखा है वह सामान्य परंपरा है। अपने कुल से मिलाएँ। जो आपके घर में नहीं है, उसे न जोड़ें।

  3. ०३

    सहायता माँगें

    ज़रूरत हो तो सेवा का अनुरोध भेजें। संदर्भ संख्या उसी समय दिखेगी। भुगतान इस पन्ने पर नहीं होता।

०१

संस्कार विधि

नामकरण से मुंडन तक — विधि समझें और अपने कुल के अनुकूल सहायता माँगें।

किसके लिए भारत और विदेश, दोनों के परिवार।

जब घर में यह पक्का न हो कि पहले क्या होता है और क्या नहीं, तो यह सेवा उसी उलझन के लिए है। आप संस्कार का नाम, शहर और अपनी शाखा लिखें। हम सामान्य क्रम बताते हैं, और माँगने पर ऐसे पुरोहित की दिशा सुझाते हैं जो आपके कुल की रीति माने।

यह पृष्ठ मुहूर्त का अंतिम पत्र नहीं है। तिथि अपने आचार्य से पक्की करें। सामग्री की सूची भी शाखा से बदलती है। प्रतिष्ठान बीच का पुल है — अर्थ यहाँ, निर्णय आपके घर में।

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०२

गृह पूजा

सत्यनारायण, हवन, गृह प्रवेश या रुद्राभिषेक — घर पर बैठने वाली पूजा।

किसके लिए अपने शहर में पूजा कराने वाले घर।

गृह पूजा के लिए जगह, सामग्री और पाठक तीनों चाहिए। फ्लैट में हवन हो सकता है या नहीं, यह हवा और सुरक्षा पर निर्भर है। आप शहर, तारीख की इच्छा और पूजा का नाम भेजें। हम तैयारी का ढाँचा लिखते हैं।

भुगतान और दक्षिणा यहीं तय नहीं होती। पुरोहित से सीधी बात होगी। प्रतिष्ठान अनुरोध दर्ज करता है ताकि परिवार को अंधेरे में न भटकना पड़े।

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०३

विवाह संस्कार

फेरों की भीड़ में विधि न खो जाए — परिवार की रीति के अनुसार सहायता।

किसके लिए विवाह की तैयारी कर रहे दोनों कुल।

विवाह में उत्सव बड़ा हो जाता है और सप्तपदी छोटी। यह सेवा उस असंतुलन के लिए है। हम वर-वधू दोनों पक्षों की रीति पूछते हैं, क्योंकि एक ही विधान दोनों पर थोपना ठीक नहीं। मुहूर्त का अंतिम निर्णय आपके ज्योतिषी या पुरोहित का रहेगा।

अनुरोध में शहर, अनुमानित माह और वह लिखें जो आपके कुल में अनिवार्य है। मंडप की सजावट हमारा काम नहीं। अग्नि के सामने का वचन हमारा विषय है।

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०४

अन्त्येष्टि और श्राद्ध

शोक के समय धीरे चलें। विधि की साफ़ जानकारी, बिना दबाव के।

किसके लिए शोक में परिवार, भारत या विदेश में।

मृत्यु के बाद परिवार को लंबा व्याख्यान नहीं चाहिए। क्या आज करना है, क्या दसवें दिन, और क्या आपके कुल में होता ही नहीं — इतनी साफ़ बात काफी है। यह सेवा उसी संक्षिप्त सहायता के लिए है। अंतिम-क्रिया स्थानीय नियमों और श्मशान की व्यवस्था से बँधी है। हम उनकी जगह नहीं लेते।

श्राद्ध बाद में आता है। तिथि, पिंड और भोजन की रीति अलग-अलग है। जो आपके घर में नहीं है, उसे भय से न जोड़ें। अनुरोध में शहर और कुल की शाखा लिखना पर्याप्त है।

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०५

विदेश से मार्गदर्शन

भारत से दूर रहकर भी बच्चों को परंपरा समझाना और संस्कार जोड़ना।

किसके लिए भारत से बाहर रहने वाले भारतीय परिवार।

दूसरी भूमि पर हर सामग्री नहीं मिलती और पुरोहित पास नहीं होता। यह सेवा उसी घर के लिए है। समय-अंतराल में बात हो सकती है। हम बताते हैं कि कौन-सा अंश घर में संभव है, और किसके लिए भारत आने या स्थानीय आचार्य की जरूरत है। बच्चों के प्रश्नों की भाषा आसान रखी जाती है।

हम यह दावा नहीं करते कि हर संस्कार पर्दे पर पूरा हो जाता है। कुछ कार्य भूमि, अग्नि और साक्षी माँगते हैं। ईमानदारी से यह सीमा बताना भी मार्गदर्शन है।

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०६

तीर्थ परामर्श

यात्रा से पहले स्थान, ऋतु और अपनी क्षमता जान लें। यह टूर पैकेज नहीं।

किसके लिए यात्रा की तैयारी कर रहे परिवार।

तीर्थ परामर्श में हम टिकट नहीं बेचते। आप बताएँ कि कौन-सा धाम है, कौन साथ जा रहा है, और किस महीने की बात है। हम ऋतु, चलने की कठिनाई और स्थानीय मर्यादा की ओर इशारा करते हैं, ताकि यात्रा आस्था रहे और दुर्घटना न बने।

बुजुर्ग, बच्चे और साँस की तकलीफ पहाड़ और भीड़ दोनों में मायने रखती है। वैष्णो देवी और बदरीनाथ को शहर के मंदिर की तरह न मापें। अंतिम बुकिंग अपने विवेक और स्थानीय व्यवस्था से करें।

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यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।