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संस्कार

गर्भाधान

संतान की कामना को संयम और उत्तरदायित्व से जोड़ने वाला पहला संस्कार।

कब दांपत्य जीवन में, संतान की कामना से पहले।

गर्भाधान सोलह संस्कारों में पहला है। इसका अर्थ केवल गर्भधारण नहीं। यह दो जनों का संकल्प है कि जो जीवन आए, वह इच्छा, संयम और जिम्मेदारी के साथ आए। गृह्य परंपरा दांपत्य को एक व्रत की तरह देखती है।

आज हर परिवार इसे एक रूप में नहीं करता। कहीं यह मंत्र और संकल्प है, कहीं बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद। प्रतिष्ठान सामान्य अर्थ बताता है। अपनी शाखा की विधि अपने पुरोहित से पूछें।

यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।

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