संस्कार
कर्णवेध
कान छिदवाना — आभूषण और स्वास्थ्य दोनों की पुरानी रीति।
कब
शैशव या बाल्यावस्था में; कई घरों में मुंडन के साथ।
कर्णवेध हर समुदाय का अनिवार्य संस्कार नहीं है। जहाँ होता है, वहाँ कान में सोना या चाँदी पहनाने और एक पुरानी स्वास्थ्य-मान्यता दोनों का स्थान है। कहीं केवल कन्याओं का, कहीं बालक और बालिका दोनों का।
आज यह स्वच्छ सुई और अनुभवी हाथ माँगता है। विधि का अर्थ समझें, और जिसे परिवार न मानता हो उसे दबाव में न जोड़ें।
यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।