तीर्थ
पंढरपुर
विठोबा और रखुमाई की नगरी। आषाढ़ी और कार्तिकी वारी यहीं आती है।
कब
वर्ष भर। आषाढ़ और कार्तिक की एकादशी पर अपार भीड़।
क्षेत्र
महाराष्ट्र
पंढरपुर वारकरी परंपरा का गंतव्य है। संत ज्ञानेश्वर और तुकाराम की पालकियाँ आषाढ़ में यहाँ पहुँचती हैं। विठ्ठल के दर्शन के साथ चंद्रभागा नदी का स्नान जुड़ा है। अभंग सुनना इस तीर्थ को समझना है।
वारी के दिनों में सड़क चलने वालों की है। गाड़ी का भरोसा कम रखें। साधारण दिनों में दर्शन शांत और गहरा होता है। मराठी न आती हो तो अभंग का अर्थ पूछें — कीर्तन में जगह बनती है।
यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।