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संस्कार

निष्क्रमण

शिशु पहली बार सूर्य और बाहर का संसार देखता है।

कब जन्म के चौथे मास के आसपास।

निष्क्रमण घर की देहरी से संसार तक का पहला पुल है। सूर्य के दर्शन, मंदिर या पीपल जैसे शुभ वृक्ष की परिक्रमा — रूप जगह के अनुसार बदलते हैं। भाव यह है कि संसार डर की जगह नहीं, देखभाल की जगह है।

भीड़ और तेज़ धूप से शिशु को बचाना भी इसी संस्कार का हिस्सा है। बाहर ले जाना प्रदर्शन नहीं, धीमा परिचय है।

यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।

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