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पूजा

सुंदरकांड पाठ

रामचरितमानस का वह कांड जिसमें हनुमान सीता तक पहुँचते हैं।

कब मंगल या शनिवार को कई घर पाठ करते हैं। कोई भी शांत दिन चलता है।

सुंदरकांड का पाठ अकेले भी होता है और बैठक में भी। हनुमान की यात्रा, समुद्र लाँघना और सीता का संदेश — कथा साहस और सेवा की है। मानस की भाषा अवधी है। अर्थ साथ में समझना पाठ को जीवित रखता है।

पूरी पुस्तक परिवार की अपनी हो। यहाँ पाठ इसलिए नहीं छपा कि कॉपी गलत न हो और आधी लय न टूटे। प्रतिष्ठान यह बताता है कि बैठक कैसे सजे, और बच्चे अर्थ कैसे सुनें।

यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।

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