भारत के परिवारों और विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए

संस्कार

अन्नप्राशन

पहला अन्न — दूध से परिवार की थाली तक का पड़ाव।

कब छठे मास के आसपास, चिकित्सक की सलाह के साथ।

अन्नप्राशन में पहला कौर अक्सर खीर, पायसम या घर के किसी शुभ व्यंजन का होता है। उत्तर और दक्षिण की थाली अलग है, भाव एक है — अब यह बच्चा कुल के अन्न का भागीदार है। अन्न को देवता मानने की आदत यहीं से घर में दिखती है।

आज बाल-रोग विशेषज्ञ भी इसी उम्र के आसपास ठोस आहार शुरू करने की बात करते हैं। संस्कार और चिकित्सा एक-दूसरे के विरोधी नहीं। दोनों को साथ रखें।

यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।

सूची पर लौटें