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संस्कार

जातकर्म

जन्म के तुरंत बाद नवजात के स्वागत का संस्कार।

कब जन्म के समय, परिवार और चिकित्सालय की स्थिति के अनुसार।

जातकर्म नवजात का पहला स्वागत है। पिता का संकल्प, मधु-घृत का स्पर्श और मंत्र — ये इस बात के चिह्न हैं कि जीवन मधुर और सुरक्षित रहे। आज प्रसव अस्पताल में होता है, इसलिए विधि को छोटे और शांत रूप में रखना ही व्यावहारिक है।

माता और शिशु की चिकित्सा पहले आती है। संस्कार उसके बाद, जब दोनों स्थिर हों। जल्दी का प्रदर्शन इस संस्कार का अर्थ नहीं है।

यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।

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