भारत के परिवारों और विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए

संस्कार

नामकरण

नाम वह पहला उपहार है जो कुल शिशु को देता है।

कब जन्म के दसवें, ग्यारहवें या बारहवें दिन — कुल की रीति से।

नामकरण में नक्षत्र, कुलदेवता और परिवार की आकांक्षा नाम में बसती है। कोई नाम रामायण से आता है, कोई पूर्वज से, कोई उस गुण से जिसे माता-पिता जीवन में देखना चाहते हैं। नाम चुनना शास्त्र और प्रेम दोनों का काम है।

विदेश में जन्मे बच्चों के लिए यह संस्कार अक्सर वह पहला अवसर होता है जब दूर बैठे दादा-दादी भी जुड़ते हैं। तिथि अपनी शाखा से पक्की करें। अर्थ यहाँ पढ़ें।

यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।

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