संस्कृति
कोलम और मार्गशी
भोर में आँगन का कोलम, और मार्गशी मास का संगीत।
कब
लगभग हर भोर। मार्गशी तमिल मास दिसम्बर-जनवरी के आसपास।
क्षेत्र
तमिलनाडु
कोलम चावल के आटे से द्वार के आगे बनाया जाता है, दिन चढ़ते मिट जाता है, अगली भोर फिर बनता है। यह सजावट और कर्तव्य दोनों है। बिंदु और रेखा गणित की तरह सीखी जाती हैं। लड़कियाँ और औरतें इसे घर की विद्या की तरह सिखाती हैं।
मार्गशी में मंदिर और संगीत सभा जागती है। अंडाल की तिरुप्पावै इसी ऋतु से जुड़ी है। भरतनाट्यम की गहराई अलग अध्ययन माँगती है। इस पृष्ठ पर घर की भोर और मास का उत्सव काफी है।
यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।