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संस्कार

अन्त्येष्टि

अंतिम यात्रा — शरीर का संस्कार और परिवार को सहारा।

कब मृत्यु के बाद, जितनी जल्दी कुल की रीति कहे।

अन्त्येष्टि जीवन-चक्र का अंतिम संस्कार है। शरीर को अग्नि या भूमि सौंपा जाता है, नाम जपा जाता है, और परिवार शोक में अकेला नहीं छोड़ा जाता। यह पृष्ठ विधि का शोर नहीं है। शोक के समय कम शब्द और साफ़ सहायता चाहिए।

श्राद्ध बाद की स्मृति है — दसवें, तेरहवें या ग्यारहवें दिन की रीति कुल पर निर्भर है। पिंडदान, गंगा या घर का जल, ब्राह्मण भोजन — जो आपके घर में हो, वही करें। जो न हो, उसे डर से न जोड़ें। प्रतिष्ठान इस समय धीरे चलने की सलाह देता है।

यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।

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