संस्कार
विवाह
दो कुल, अग्नि के साक्षी, और साथ निभाने का संकल्प।
कब
गृहस्थ आश्रम का प्रवेश। मुहूर्त अपने आचार्य से।
विवाह सोलह में सबसे विस्तृत संस्कार है। कन्यादान, हस्तमेलन, सप्तपदी या अपने कुल की दूसरी विधि — नाम बदलते हैं, अग्नि के सामने दिया गया वचन नहीं बदलता। यह उत्सव भी है और धर्म-संकल्प भी। दोनों को सँभालें। दिखावे को संस्कार पर हावी न होने दें।
प्रतिष्ठान मुहूर्त बेचता नहीं। शुभ समय अपने पुरोहित या ज्योतिषी से पक्का करें। हम विधि समझने और, माँगने पर, आयोजन की सहायता जोड़ने का द्वार हैं। वर और वधू दोनों की मर्यादा विधि का हिस्सा है।
यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।