संस्कार
केशान्त
पहली दाढ़ी का क्षौर — युवावस्था की देहरी।
कब
ब्रह्मचर्य के अंत की ओर, कुल की रीति से।
केशान्त या गोदान में पहली बार दाढ़ी उतारी जाती है और गुरु को दक्षिणा दी जाती है। यह अध्ययन के वर्षों का समापन-संकेत है। हर समुदाय इसे अलग नाम से जानता है, और कई घरों में यह समावर्तन में ही समा जाता है।
युवा की सहमति और सादगी यहाँ शोभा देती है। महँगे प्रदर्शन से संस्कार बड़ा नहीं होता।
यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।