संस्कार
वेदारम्भ
वेद या अपनी शाखा के प्रधान ग्रंथ के अध्ययन का आरंभ।
कब
उपनयन के बाद, जहाँ वह परंपरा हो।
वेदारम्भ अध्ययन को औपचारिक संकल्प बनाता है। किसी घर में यह वेद का एक सूक्त है, किसी में गीता का पहला अध्याय, किसी में अपनी शाखा का प्रधान ग्रंथ। नाम वेद का है, अभ्यास अपने कुल का।
आज की पढ़ाई लंबी और दूसरी तरह की है। यह संस्कार स्कूल की जगह नहीं लेता। वह याद दिलाता है कि विद्या ऋण है, केवल परीक्षा नहीं।
यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।