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संस्कार

उपनयन

जनेऊ और गुरु के निकट जाने की दीक्षा — जिन कुलों में यह परंपरा है।

कब शाखा और कुल के अनुसार। हर समुदाय का संस्कार नहीं।

उपनयन उन परिवारों का संस्कार है जिनकी शाखा में यज्ञोपवीत दिया जाता है। गुरु के निकट ले जाना, विद्या और संयम की दीक्षा, और तीन ऋणों की स्मृति — ऋषि, पितृ और देव — इसका भाव है। इसे हर भारतीय पर थोपना परंपरा का अपमान है, पालन नहीं।

जिन घरों में यह होता है, वहाँ भिक्षा, मेखला और गायत्री का उपदेश विधि का हिस्सा हो सकता है। उम्र और रूप अपने आचार्य से पक्के करें। जो घर नहीं करते, वे विद्यारम्भ और विवाह जैसे संस्कारों से ही जीवन सँवारते हैं।

यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।

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