तीर्थ
हरिद्वार
गंगा मैदान में उतरती है। हर की पौड़ी से हिमालय के धाम खुलते हैं।
कब
वर्ष भर। सायं आरती स्थिर कार्यक्रम है।
क्षेत्र
उत्तराखंड
हरिद्वार अपने आप में तीर्थ है और आगे की यात्रा का द्वार भी। हर की पौड़ी की आरती रोज होती है। यहीं से कई यात्री यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ की ओर बढ़ते हैं। भारत के चार कोनों के धाम दूसरे हैं — बदरीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम। दोनों बातें सच हैं, गड्डमड्ड न करें।
आरती से पहले घाट पर जगह बना लें। डुबकी अपनी क्षमता से लगाएँ। प्रवाह तेज़ हो तो किनारे का स्पर्श ही पर्याप्त है।
यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।