संस्कृति
बंगाल की दुर्गा पूजा
देवी का आगमन, पड़ोस का पंडाल, और दशमी का विसर्जन।
कब
आश्विन की षष्ठी से दशमी तक।
क्षेत्र
बंगाल
दुर्गा पूजा बंगाल में घर और नगर दोनों की संस्कृति है। पंडाल कला है, ढोल और धुनी है, और दशमी को सिंदूर खेला तथा विसर्जन है। प्रतिमा महीनों से गढ़ी जाती है। यह केवल दर्शन नहीं, सामूहिक श्रम है।
कोलकाता की बड़ी पूजा और एक मोहल्ले की छोटी पूजा दोनों सच हैं। बच्चों को प्रतिमा की आँख खुलने से विदाई तक की कथा सुनाएँ। विदेश की पूजा में विसर्जन नदी के बजाय नियम के अनुसार होता है — स्थानीय कानून मानें, भाव न छोड़ें।
यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।