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तीर्थयात्रा

जहाँ परंपरा भूमि से जुड़ती है

काशी से रामेश्वरम तक। यह टूर सूची नहीं। ऋतु, भीड़ और अपनी क्षमता जानकर निकलें। चार दिशाओं के धाम और हिमालय के धाम दोनों यहाँ हैं — गड्डमड्ड न करें।

  1. ०१ काशी गंगा के तट पर बसी नगरी, जहाँ शिव और मृत्यु दोनों का संस्कार है। उत्तर प्रदेश
  2. ०२ अयोध्या सरयू तट की नगरी, राम की कथा का घर। उत्तर प्रदेश
  3. ०३ प्रयागराज गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी। उत्तर प्रदेश
  4. ०४ हरिद्वार गंगा मैदान में उतरती है। हर की पौड़ी से हिमालय के धाम खुलते हैं। उत्तराखंड
  5. ०५ बदरीनाथ हिमालय का बदरी धाम। शीत में कपाट बंद रहते हैं। उत्तराखंड
  6. ०६ द्वारका पश्चिम का धाम, कृष्ण की नगरी, गोमती संगम। गुजरात
  7. ०७ पुरी पूर्व का धाम। जगन्नाथ, रथ यात्रा और महाप्रसाद। ओडिशा
  8. ०८ रामेश्वरम दक्षिण का धाम। रामनाथस्वामी और द्वीप की तीर्थ-कथा। तमिलनाडु
  9. ०९ तिरुपति सप्तगिरी पर वेंकटेश्वर। दर्शन की तैयारी पहले से करें। आंध्र प्रदेश
  10. १० उज्जैन महाकाल ज्योतिर्लिंग और क्षिप्रा। सिंहस्थ कुंभ का नगर। मध्य प्रदेश
  11. ११ वैष्णो देवी त्रिकुटा पहाड़ पर पदयात्रा। यह आसान सैर नहीं। जम्मू
  12. १२ पंढरपुर विठोबा और रखुमाई की नगरी। आषाढ़ी और कार्तिकी वारी यहीं आती है। महाराष्ट्र

यह सामान्य परिचय है। क्रम, सामग्री और मुहूर्त कुल, क्षेत्र और शाखा के अनुसार बदलते हैं। अपने पुरोहित और अपनी रीति को अंतिम मानें।